व्यंग्यलेख

12 Oct 2020

मन की बात


 

मोहनलाल मौर्य मोहनलाल मौर्य at Monday, October 12, 2020
Email ThisBlogThis!Share to XShare to FacebookShare to Pinterest
Tags: लेख

No comments:

Post a Comment

Newer Post Older Post Home
Subscribe to: Post Comments (Atom)

मेरे बारे में

My photo
मोहनलाल मौर्य
( युवा व्यंग्यकार) पिता का नाम- श्री चंदर लाल मौर्य ( सेवानिवृत्त व.अ.) जन्मतिथि- 25 नवम्बर 1988 शिक्षा-एम.ए,बीएड़,पत्रकारिता में स्नातक (बीजेएमसी) अभिरूचिः- व्यंग्य लेखन एवं फोटोग्राफी संप्रतिः-स्वतंत्र लेखक अमर उजाला,दैनिक जागरण,दैनिक भास्कर,नईदुनिया,हिन्दुस्तान,प्रभात खबर,दैनिक हरिभूमि,रविवार भारती(हरि‍भूमि),नवभारत टाइम्स,परिवार परिशिष्ट (राजस्थान पत्रि‍का) डेली न्यूज जयपुर,नवोदय टाइम्स,दैनिक जनवाणी,जनसंदेश टाईम्स,न्यूज टुडे,सुबह सवेरे,दैनिक ट्रि‍ब्यून,सच बेधड़क,प्रदेश की हलचल भोपाल,न्यूज फॉक्स,अट्टहास,विभोम स्वूर,अनवरत,लोकोदय,व्यं‍ग्योदय,ककसाड़ सहित देश के प्रमुख पत्र-पत्रि‍काओं व्यंग्य रचनाएं प्रकाशित। साझा व्यंग्य संग्रहः- नये नवेले,व्यंग्य प्रसंग,व्यंग्यकारों का बचपन में सम्मिलित । कृतिः- राजस्थान साहित्य अकादमी के आर्थिक सहयोग से प्रकाशित व्यंग्य संग्रह चार लोग क्या कहेंगे ।
View my complete profile

पृष्ठ देखे जाने की कुल संख्या

चार लोग क्या कहेंगे

चार लोग क्या  कहेंगे
राजस्थान साहित्यक अकादमी के आर्थिक सहयोग से प्रकाशित व्यंग्य-संग्रह

प्रिय प्रशंसक

ब्लॉग संग्रह

  • ►  2023 (2)
    • Mar (1)
    • Jan (1)
  • ►  2022 (6)
    • Jul (2)
    • Jun (4)
  • ►  2021 (5)
    • Mar (2)
    • Feb (3)
  • ▼  2020 (32)
    • Dec (1)
    • Nov (3)
    • Oct (2)
    • Sept (1)
    • Aug (4)
    • Jul (2)
    • Jun (4)
    • May (3)
    • Mar (8)
    • Feb (4)
  • ►  2019 (67)
    • Dec (1)
    • Nov (4)
    • Oct (5)
    • Aug (3)
    • Jul (5)
    • Jun (7)
    • May (7)
    • Apr (9)
    • Mar (8)
    • Feb (13)
    • Jan (5)
  • ►  2018 (42)
    • Nov (2)
    • Oct (3)
    • Sept (3)
    • Aug (2)
    • Jul (4)
    • Jun (6)
    • May (5)
    • Apr (2)
    • Mar (4)
    • Feb (2)
    • Jan (9)
  • ►  2017 (45)
    • Nov (2)
    • Oct (2)
    • Sept (5)
    • Aug (5)
    • Jul (4)
    • Jun (3)
    • May (9)
    • Apr (3)
    • Mar (2)
    • Feb (5)
    • Jan (5)
  • ►  2016 (32)
    • Dec (2)
    • Nov (1)
    • Oct (3)
    • Sept (2)
    • Jul (2)
    • Jun (4)
    • May (3)
    • Apr (10)
    • Mar (5)

श्रेणियाँ

  • व्यंग्य
  • फोटोग्राफी
  • Satire
  • लेख
  • न्यूज
  • कहानी
  • दृश्या्दृश्य
  • शख्सियत
  • साक्षात्कार
  • मोहनलाल मौर्य
  • व्यंग्यरकारों का बपचपन
  • समीक्षा

लोकप्रिय लेख

  • जुगाड़ की जुगत
    मोहन लाल मौर्य आज कल जिसे देखों वहीं किसी ना किसी जुगाड़ की जुगत में लगा हुआ है। खुद से जुगाड़ हो गया तो पौ बारह पच्‍चीस। अन्‍यथा किसी ओ...
  • होली की होली और भड़ास की भड़ास
    होली एकमात्र ऐसा पर्व है। जिस पर भड़ास निकालने वाला होली की होली खेल लेता है और भड़ास की भड़ास निकाल लेता है। अहसास तक होने नहीं देता।...
  • अब तो लौट आओ प्‍यारे- दैनिक जनसंदेश टाइम्‍स
    26 मार्च 2016 दैनिक जनसंदेश टाइम्‍स में व्‍यंग्‍य-  'अब तो लौट आओ प्‍यारे'
  • शब्दों के साथ व्यंग्यकार की होली
    फागुन का आगमन होते ही व्यंग्यकार का मन शब्दों के साथ होली खेलने को मचलने लगता है।   भले ही शब्द खेलने के लिए तैयार नहीं हो। उन्हें तुकबंदी स...
  • कहो तो रंगलाल कितने गोले रंग
    रंगलाल  पर पिछली बार मोहल्ले के सारे छोरे टूट पड़े थे। गनीमत रही कि उसके शरीर का एक भी अंग नहीं टूटा। अगर टूट जाता तो टूटकर पड़ने वालों की ख...
  • महंगे और सस्ते का संवाद
    कल तक प्याज आलू के साथ रहता था , मगर आजकल सेब के साथ उठने-बैठने लगा है। अपने आप को   बड़ा और एलिट किस्म का समझने लगा है। किसी भी सब्जी से सी...
  • मूर्ख नहीं डेढ़ गुणा समझदार
    मोहनलाल मौर्य आप भले ही उसे मूर्ख समझते होंगे। वह तो अपने आपको समझदार समझता है। समझता क्या है ? समझदार है। उसका अभिनय देखकर मूर्ख समझना...
  • कड़ाही नहीं चाहती लड़ाई
    कदाचित ही ऐसा कोई घर होगा , जहाँ दो बर्तत आपस में नहीं टकराते होंगे। पुरानी कहावत भी है कि घर में दो बर्तन होंगे , तो टकराएंगे भी। अक्सर   न...
  • रावण ने देखा अपना दहन - दैनिक जनवाणी
    रावण ने देखा अपना दहन रावण दहन का लाइव कास्‍ट देखने खुद रावण भी आया है। रामलीला मैदान खचाखच भरा हुआ है।   कोलाहल माहौल है। सबकी निगा...
  • होली की होली, भड़ास की भड़ास
    मोहनलाल मौर्य वह ‘बुरा न मानों होली है’ कहता हुआ घर से निकला है। रंग-गुलाल हाथ में हैं तथा मन में भड़ास की भावना है। वह जिस पर रंग-गु...
Awesome Inc. theme. Powered by Blogger.